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शनिवार, 29 दिसंबर 2012

"धरना-प्रद्र्शन, लोकतन्त्र की शान!" (कार्टूननिस्ट-मयंक)

3 टिप्‍पणियां:

  1. जब फूट जाएँ, सरकार और उसके मुलाजिमों के कान,
    धरना-प्रदर्शन ही बनकर रह जाते है लोकतंत्र की शान !!

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  2. शानदार अभिव्यक्ति,
    जारी रहिये,
    बधाई।

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