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रविवार, 25 नवंबर 2012

"टोपी मत उछालो" (कार्टूननिस्ट-मयंक खटीमा)

टोपी क्या मिली? 
उछालने ही लगे!

6 टिप्‍पणियां:

  1. रहा भुनाता विश्व यह, बड़े बड़ों का नाम ।

    आदत इसकी यूँ पड़ी , चले सड़ों का नाम ।

    चले सड़ों का नाम, पिन्हाते रहते टोपी ।

    चलते गाँधी आज, हुई मकु नीति अलोपी ।

    अन्ना अपने बाप, हमारा अब भी नाता ।

    टोपी बेटा पहिर, नाम को चला भुनाता ।।

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  2. जब आम आदमी का नाम लेकर एक अँगरेज़ की भारतीयों का समर्थन प्राप्त करने के लिए बनाई गई पार्टी टोपी पहने रह सकती है 127 साल ,तो केजरीवाल क्या अपनी बाप सामान अन्ना जी की भी टोपी नहीं पहन सकते ?

    आखिर केजरीवाल का इतना खौफ क्यों ?

    नाई नाई बाल कित्ते ...........हो लेने दो आगामी चुनाव सामने आ जायेंगे .

    केजरीवाल की पार्टी में कोई अँगरेज़ सर का खिताब नहीं बाँट रहा है .यह भारत धर्मी समाज की आवाज़ है जिसे अब कोई दबा नहीं सकेगा .चिंगारी ही आग बनती है एक चिंगारी तो उठने दो यारों .

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  3. भाई वीरेन्द्र शर्मा जी...!
    वोट बाप को दोगे या बेटे को...!

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  4. अगर केजरीवाल सही है तो टोपी उछालने जैसी कोई बात नहीँ।
    www.yuvaam.blogspot.­com

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